Friday, January 25, 2008

जूदेव के कुत्ते


क्या आप दिलीप सिंह जूदेव को जानते हैं? ये वही जूदेव हैं जो अपने छत्तिसगढ के कुछ इलाकों में अपने घर वापसी(पुनर्धमांतरण) कार्यक्रम को लेकर चर्चा में रहे हैं.इसके अलावा तहलका के स्ट्रींग आपरेशन में जूदेव को पैसा लेते हुए दिखाया गया था.उसमें जूदेव को यह कहते हुए सुना गया था ,
पैसा खुदा तो नहीं लेकिन खुदा से कम भी नहीं.


जशपुर में जूदेवजी से मुलाकात हुई.रात में फोन किया तो मालूम हुआ जूदेव जी व्यस्त थे.उस दिन जशपुर में राज्य सरकार का और राज्य भाजपा का एक मिलाजुला कार्यक्रम था.दरअसल चुनावी मौसम में पूरे छत्तिसगढ में राज्य सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिये ३ रुपए प्रतिकिलो चावल बांटने का फ़ैसला किया है. सो पुरे राज्य के हर ज़िले में भाजपा के बडे बडे नेता मौजूद थे. इस योजना का शुभारंभ करने के लिये.गाडियों में भर भर कर लोगों को ज़िला मुख्यालय पहुंचाया गया था.सो उन्हें वापस भेजने का काम भी देर रात तक चलता रहा.

खैर सुबह में मिलने का समय तय हुआ.हम जशपुर में उनके घर पहुंचे.घर क्या था पूरा फ़ार्म हाउस था.या यूं कहें बगीचे के बीच में एक घर.जूदेव आये. उनके साथ उनके चार कुत्ते भी आये. हम बैठे. नाश्ता आया.बिस्किट और चाय के साथ. हमारा कैमरामैन कुछ कटअवेज़ बनाने लगा. बात शुरु हुई. अपनी मूछों पर ताव देते जूदेव कभी दोनों हाथों को फ़ैलाते कभी दोनों हाथों को सामने की तरफ़ लहराते.पूरा टशन.शानदार व्यक्तित्व के मालिक जूदेव की हर चीज में टशन.उनकी हर अदा सामने वाले को अह्सास कराती हुई कि मैं यहां का राजा हूं. कि किस तरह से उनके पिताजी ने सरदार पटेल को वो राज्य यूहीं दे दिया जिसे उन्होनें अपने तलवार के बल पर जीता था.

बातें होती रहीं. तभी उन्होनें अपने कुत्तों को बुलाया. चारों कुत्ते दुम हिलाते हुए उनके पास आ गये. दीलिप सिंह जूदेव ने कहा देखिये मैं एक खेल दिखाता हूं. उन्होनें बिस्किट का एक टुकडा कुत्तों की तरफ़ फेंका. उनका कुत्ता लपका. जूदेव ने तुरंत मना किया,"नहीं".और कुत्ता रुक गया. उन्होंने दुसरे टुकडे को दूसरे कुत्ते की तरफ फ़ेंका. वो भी लपका. उन्होनें कहा," नहीं". वो भी रूक गया. ऐसा उन्होनें हर कुत्तों के साथ दुहराया. और हर कुत्ता ऐसे ही उनकी बातों को माना.

वो लगे कहानी सुनाने. इन कुत्तों ने छत्तिसगढ की सरकार बनवाई है. जब चुनाव से पहले भाजपा के विधायकों को कांग्रेस ने तोड लिया था तो मैंने जश्पुर की रैली में इन कुत्तों का यह ड्रामा जनता को दिखाया. कहा ये चार पैर का जानवर मेरी बात मानता है और ये दो पैर वाले आपकी बात नहीं सुनते! आप इन दो पैर वालों को ठीक किजिये मैं उन्हें खराब करने वालों को संभालता हूं.फिर क्या था...सभी पूर्व विधायक चारो खानों चित.और रायपुर में कमल खिला.यह तो हमारे दुश्मनों ने हमारे खिलाफ़ साजिश कर दी.क्या हम मजाक में कोई शेर भी नहीं पढ सकते...पैसा खुदा तो नहीं लेकिन खुदा से कम भी नहीं...

मैनें बडे ध्यान से सुना और देखा भी. सोचता रहा. क्या मायने हैं इन बातों के? जूदेव ने इशारों में क्या आज के नेत्ताऒं के उपर छिंटाकशी की? शायद नहीं शायद हां...मुझे समझ में नहीं आया ...आखिर जूदेव किस ओर इशारा कर रहे थे? आखिर वो किसको कठघरे में खडा करना चाहते थे...आपको कुछ समझ में आये तो हमें भी बतायें...

3 comments:

कुमार आलोक said...

वास्तव में ये जूदेव ही नही बल्कि ऊन सारे संघी नेताओं का दर्द है , जो सत्ता के नज़्दीक रहते हुए भी सत्ता का स्वाद् नही चख सके. अपने ज़माने में जूदेव की छवि राबिनहूड सरीखे थी , राज्वाडों की ठाट अलग से.लेकिन भजपा हमेशा से ऐसे नेताओ से किनारा करती रह्ती है. उमा का विकल्प बाबू लाल गौड नही हो सकते. मोदी भी भाजपा को भीतर से नही पचते. भाजपा को केन्द्र में सर्कार बनाना है. ऐसे में भाजपा के ओरिजिनल मुद्दे अन्धेरे में चले जाये तो इसमें आष्चर्य कैसा.

Anonymous said...

क्या आप दिलीप सिंह जूदेव को जानते है मुझे जो पता है ये वही नेता है जिसने सुन्दर लाल पटवा को मुख्यमंत्री बनाने के लिए आपनी कुर्सी छोड़ दी थी फिर २००३ में अजित जोगी ने टेप कांड में फसाया लेकिन दिलीप सिंह जूदेव ने फिर जनादेश पाया ,लेकिन भाजपा जो सिर्फ ऐशे नेताओ को छोड़ के मतलब कि राजनीत करने वाले नेताओ के भरोसे है जो अपने स्वार्थ के लिए पार्टी कि नीतियों को सरे राह बेचने में भी देर न करे शायद कुत्तो के माध्यम से दिलीप सिंह जूदेव भाजपा के उन नेताओ को समझा रहे हो कि पार्टी बड़ी है न कि हम

sushant shukla said...

क्या आप दिलीप सिंह जूदेव को जानते है मुझे जो पता है ये वही नेता है जिसने सुन्दर लाल पटवा को मुख्यमंत्री बनाने के लिए आपनी कुर्सी छोड़ दी थी फिर २००३ में अजित जोगी ने टेप कांड में फसाया लेकिन दिलीप सिंह जूदेव ने फिर जनादेश पाया ,लेकिन भाजपा जो सिर्फ ऐशे नेताओ को छोड़ के मतलब कि राजनीत करने वाले नेताओ के भरोसे है जो अपने स्वार्थ के लिए पार्टी कि नीतियों को सरे राह बेचने में भी देर न करे शायद कुत्तो के माध्यम से दिलीप सिंह जूदेव भाजपा के उन नेताओ को समझा रहे हो कि पार्टी बड़ी है न कि हम